अनुभव मेरी तुंगनाथ यात्रा

उत्तराखण्ड , भारत का ऐसा राज्य जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वह धरती जँहा स्वयं शिव शंकर निवास करे, वह धरती जँहा पवित्रत्ता हवा से लेकर पानी तक और विचारो से लेकर आचारो तक विध्यमान रहे।
तुंगनाथ शिव मंदिर , उत्तराखण्ड –

( विश्व का सबसे ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिर )
मेरा अनुभव, मेरा मानना है की हमेशा जो अपने अनुभव साझा करते है उनकी सुननि चाहिए क्या पता उनके अनुभव से हमारी यात्रा बड़ी सुखदायक और यादो और अनुभव से भरपूर हो सके |
मे और मेरी तुंगनाथ यात्रा का विवरण चोपता से शुरू करूँगा जो की तुंगनाथ की ट्रेकिंग का शुरूआती पॉइंट है।
हम चोपता बाइक से पहुँचे थे क्यों की हमारा मानना है की सफर में रोमांच और प्रकृति की खूबसूरती , नज़ारे का आनंद तभी ले पायंगे अगर आप अपनी यात्रा के लिए बाइक को अपना साथी बनायंगे | अगर आप यात्रा का जूनून रखते है तो आप मेरी बात से अवश्य सहमत होंगे |
वैसे तो हमारे यात्रा का प्रारूप कुछ ऐसा था –
ऋषिकेश – देवप्रयाग – रुद्रप्रयाग – धारी माता मंदिर – चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला
तुंगनाथ के लिए हमने फरवरी माह चुना क्यों की हमे सिर्फ ट्रेकिंग करनी थी यह जानते हुए की इस दौरान हमे मंदिर के पाट बंद मिलेंगे क्यों की शीत ऋतू में बर्फ से पूरा परिसर आच्छादित हो जाता है | दिसम्बर और जनवरी माह भी उचित नहीं होंगे अत्यधिक बर्फ़बारी से असल यात्रा का आनंद नहीं आ पाएगा और मुख्य आकर्षण चंद्रशिला से सूर्य उदय और सूर्यास्त नहीं देख पायंगे | चोपता में हम शाम को पहुंचे रात्रि विश्राम चोपता में किया एवं बहुत ज्यादा नहीं लेकिन पर्याप्त मात्रा में आपको सही दाम में ठहरने के लिए नॉर्मल सा विश्राम ग्रह मिल जाता है और खाने और पिने के लिए भी रेस्ट्रो है जंहा पर सही दाम में ठीक ठाक खाना मिल जाता है और भी ड्रिंक्स वैफर चाकलेट आदि मिल जाते है | लेकिन ऊंचाई पर होने की वजह से अँधेरा जल्दी हो जाता है तो याद रहे सही वक़्त रहते पहुँचना है फिर अंधेरो में जंगली जानवर का डर और लाइट की सुविधा इतनी अच्छी भी नहीं है | अब अगली सुबह का इन्तजार और थकावट की जंग में कब नींद की आगोश में चले गए की इन्तजार कब खत्म हुआ और मोबाइल अलार्म ने सबको इसी जोश के साथ में उठाया की अब हमे नज़ारे , खूबसूरती , वादियों , हरियाली , हिमालय , देवादि देव महादेव की अनुभूति , सुकून , ख़ुशी , शांति , न भूल पाने वाले पल , इन सब का मिश्रण देखने को मिलने वाला है | उठने के बाद नहाने के बाद सब तैयार ज्यादा बर्फ नहीं होने की वजह से हमने हमारे स्पोर्ट्स शू में और गर्म वस्त्रो के साथ निकलने का तय किया |
अगर आप अपने ग्रुप के साथ है तो आपको किसी गाइड की आवश्यकता नहीं है गाइड हायर करे ऐसा कुछ नहीं है
स्पोर्ट्स शू बेहतर ऑप्शन है और पिने का पानी और एनर्जी ड्रिंक साथ अवश्य ले सुनने में मात्र ३km की ट्रेकिंग हमे 30km चलने का अनुभव करवाती है।
रास्तो और कठिनाइयों से अनभिज्ञ निकल पड़े हर हर महादेव के नारो के साथ एंट्री पर आपसे एंट्री करवाई जाती है फारेस्ट डिपार्टमेंट द्वारा और अब शुरू हो जाती है हमारी यात्रा
रास्ता – पक्का और सीढी दार , रास्तो के चारो तरफ बस जंगल और पहाड़ बर्फ से ढके तो कंही कल कल बहता पानी तो कंही गहरी गहरी खाई और घुमावदार रास्ता इन मनोरम नजारो के साथ यात्रा बड़ी जोश के साथ आगे बढती है लेकिन ऑक्सीजन की कमी जैसे जैसे ऊंचाई बढ़ती जाती है ओक्सिजन की कमी होती जाती है इसी कमी की वजह से थकावट कब अपना घर बना लेती हे और आप थक कर न जाने कितनी बार बैठने पे मजबूर हो जाते हैं ॥
रास्तो में कुछ छोटी छोटी दूकाने मिलती हे जिधर पानी और खाने में मैगी मिल जाती हे और थकान में वो भी सुकून दे जाती हे आखिर २-३ घंटो की थका देने वाली ट्रेकिंग के साथ आप मंदिर परिसर पहुँच जाते हे ॥
थकान का कोई निशा नहीं बस अब तो मात्र शिव और शिव के होने की अभिभूति ,आँखों ने ऐसे नज़ारे आज से पहले कभी नहीं देखे इन नाजारो को बया नहीं केवल महसूस किया जा सकता है | इसे स्वर्ग कहूँ या अपनी किस्मत कहूँ ॥

अब तुंगनाथ से १km की और कठिन चढ़ाई के बाद आखरी पॉइंट है ट्रेकिंग का. अगर तुंगनाथ गए और चन्द्रशिला ना गए तो फिर क्या गए । हकीकत हमे भी ऊपर चोटि पहुंचने के बाद पता चली
बर्फ से आच्छादित पूरा पहाड़ अब ऊपर चोटि पर जाना अपने आप में एक टास्क और डेरिंग दोनों है लेकिन रिस्क और डेरिंग उठा के चोटि जाने पर जिन नज़ारों का अनुभव होता हे वो अध्भुत है केदार घाटी की सारी पहाड़िया बर्फ से ढकी और शिव की उपस्थिति का अनुभव ,
कमाल की यात्रा और अनुभव क्या कहे
इस सुखद यात्रा पर अवश्य जाए लेकिन मौसम को मद्देनजर रखते हुए और आप क्या अनुभव करना चाहते हे उस हिसाब से जाए क्यों की जब पाट खुले होंगे मंदिर के तब के नाजारो का अनुभव और प्रबंध अलग और जब पाट बन्द होंगे मोसम अलग होगा उस दौरान अनुभव अलग होगा | तो माह, मौसम का चयन आप क्या और केसा अनुभव करना चाहते हैं उस आधार पर करे
धन्यवाद , जय शिव शंकर 🙏

Comments

  1. Suresh gurjar

    Jai shree mahakal …🙏

    Thank you for sharing your tour with a article . are very excited about this topic because this article feels like me sharing a tour

    Regards

  2. Asha Rai

    Jai Bholenaath….. 🙏🏻🙏🏻
    I’m very thankful that i found such a good information…. Thanks a lot…
    Thanks for sharing such a well written article….
    Jai bholenaath 🙏🏻🙏🏻

  3. Manoj singh

    आपने बहुत अच्छी जानकारी साझा की इसके लिए आपका धन्यवाद जय महाकाल

  4. Bhagawan Dhaker

    Jai Bholenath… I m very thankful that I found such good information … Thanks for sharing such a well-written and keep it bro

  5. Lokesh Bairwa

    Such a nice detail of place .very informative article.
    Yah artical pdke mujhe bhut acha lga…selection of launguage is very nice..impressive….Jai Bholenath

  6. Pallavi chauhan

    Jai shambhu… I m very thankful that I found such good information … Thanks for sharing such a well-written article…

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