अन्तःस्मरण

तू अशुद्ध है गर क्रुद्ध है
पर शुद्ध है गर बुद्ध है
जीवन के इस रणयुद्ध में
जीतेगा गर तू प्रबुद्ध है
आशीष वचनों को लिए
चल साथ अपनों को लिए
गर कर्म तेरा धर्म है
तो न रास्ता अवरुद्ध है
होगा भला ये मान कर
सब बड़ों का सम्मान कर
सच बोल चाहे मर मिटे
दुनिया भी चाहे क्षुब्द्ध है
ना कह कोई भी कटु वचन
ईश्वर चरण में कर नमन
लड़ना मनुज का अन्तःविकृति से
जीवन का असली युद्ध है

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