ओशकी बूँद!

गहन भोरमें ये
रहे दूर कोश
मंद किरणें छेड़ जाये
आये इसको होश!
न बादल कहीँ पे
न बारिशकी बूंदें
मगर डाली डाली
पत्ते-पत्ते पे कूदे
ये पर्दा अनोखा
या तालोंका ताला
या भीगी हुयी चादर पे
मकडेका जाला?
टप-टप, टिप-टिप ये गाये संगीत
मैं भी कुंदू और नाचूँ, मुझको होगयी है प्रीत
S प्रीतमें मेरे ये कानोंको चूमे
एक पल रुक मैं जाऊं
जब ये पलकों पे घूमे
कभी कर्णों में लटके
जैसे कोई मोती
और शीषपर जैसे
कोई ठहरी सी टोपी
किसी बूढ़े पेड़की जीवनकी मोली
कहीँ केलेके पत्ते पे हो कपुरकी गोली
सबेरे-सबेरे जगजीतके आये
फिर कहीं धरतिमें समाजाये
ढीलेढाले रहते हैं सब
अपनी ढीलका हमें देते दोष रोते-
रोते ये कहगया मेरा दोस्त
मेरे हाथमें बूँद एक ओश!

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