कोख से बातें।

ओ मेरे प्यारे बच्चे, मां जो सीखे उसे ध्यान से सुनना।

कुछ समझाने की कोषिश करना, न समझो तो दोहराने को कहना।

मुझे मालूम है कुछ समझ आएगा, कुछ सिर के ऊपर से ही चला जाएगा।

कुछ याद रखोगे, कुछ याद करके भी भूल जाओगे।

कुछ बातें कह रही हूं, कोशिश है की तुम्हें एक अच्छा इंसान बना रही हूं।

बढ़ो के सामने सिर झुकाने से न डरना, और अगर लगे तुम बिलकुल सही हो तो अकेले खड़े रहने में भी ना कतराना।

कभी किसी की मदद को ना मत करना, कभी किसी से घृणा ना दिखाना।

हो सके तो हर गिरे को उठाना, पर खुद को उठाने के लिए किसी को ना गिराना।

रिश्तों का मोल समझना, बस प्यार के दीप जलाए रखना।

कोई लाख दुखाए दिल तुम्हारा, तुम अपने सपनों की लो अपनी दिल में जगाए रखना।

दुनिया जब बताये कितनी ख़ामी है तुम में, अपनी हिम्मत बनाया रखना।

सब अगर कहेंगे की कुछ नहीं हो तुम, तब भी अपनो की आंखों में खुद को बसाए रखना।

जब कुछ समझ ना आए, आंखें बंद करके मां की बातों को याद करना।

माफ़ी होगी तुम्हें कभी अगर अपना धर्म ना निभा पाओ, पर इंसानियत निभाए रखना।

कुछ कर सको ना कर सको, बस अपनी हिम्मत जूटाये रखना।

जब बिखरने लगो तुम, अपनी मां के आंचल में सिमटने को आजाना।

अगर तुम बेटी हुई, तो किसी को तुम अपने दायरे न बताने देना।और अगर हुए तुम बेटा, हर औरत की लाज रखना ही अपना धर्म मान लेना।

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