कोरा काग़ज़

किताब का एक कोरा पन्ना –
जब संवेदनाओं की पूरी कहानी कहने लगा,
सोचने लगे वो यू हीं –
वो आखिर क्या था ?? ..
अगर यही सच है तो अब तक –
जो अनगिनत पन्नों में लिखी कई कहानियां पढ़ीं..
शब्दों को पंक्तियों में बदलने की महज इनकी मज़बूरी ?..
या जीवन में समाहित वैसी अभिव्यक्तियां ? ..
जो कोरे कागज को भी.
अपनी कहानी कहने को तैयार कर रहा हो !

स्वरचित @ निशीथ सिन्हा

Leave a Reply

Your email address will not be published.