क्यू भगवान बनादिया?

ना कृष्ण ना क्रैस्ट ना अल्लाह हूं
ना संत ना फादर ना सूफी हूं
ना कोई जादुई शक्तियां मेरे पास हैं
की तुम भी समज जाओ काश ये

बस जो पढा और सीखा हैं
उसीसे जानें बचाने की सिर्फ कोशिश करता हूं
यू कभी जान जोखीम हों
तब भी तुम्हें हसाने की ख्वाइश करता हूं

वो जो लाशों की कतारें लग रहीं हैं
थोडे दफन होगयें, थोडे जल रहीं हैं
उस दुःख के आग में, मैं भी तो सुलग रहां हूं
बस तुम देख ना पायें, पर मैं भी तो रो रहां हूं

तुम अगर मदद की उम्मीद से आओ
तो तुम्हें बचाने की हर कोशिश कर सकता हूं
मैं कोई भगवान नहीं की तुम्हारें उडते प्राण पंछी को
तुम्हारें देह से जोडकर रख सकता हूं

जो चला गया, उसे बचाना मेरा भी तो सपना था
जो सिर्फ अब याद हैं, वो मेरा भी तो अपना था
जानें जो बचायीं, उनकी शाबाशियां चाहें ना दों
पर इंसानियत को छोड, मुझपर वार अब तुम ना करों

मैं सिर्फ एक डॉक्टर हूं, मेरी भी बात अब केहने दों
मैं इंसान हूं बस, मुझें इंसान ही रेहनें दों
तारीफों के पुल बांधकर, क्यू भगवान बनादिया?
और एक ही क्षण में प्रहार कर, बस बेजान बनादिया!

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