खुद में गौर करने लगा हूं मै

किसी को देख कर खुद में गौर करने लगा हूं मै
हूं काफ़िर, लेकिन नमाज़ पढ़ने लगा हूं मै।

वो दौर और था चप्पल पहने निकाल जाता था कहीं भी
उससे मिलने के लिए जूते बदलने लगा हूं मै।

कहीं मजलिस में जाना हो तो कभी आएने में नहीं देखा खुद को
उसका वीडियो कॉल आते ही बालों को संवारने लगा हूं मै ।

और में! जिसने जिंदगी भर मां के खरीदे कपड़े पहने
उसे देख कर शॉपिंग करने लगा हूं मै।

यूं तो याद भी नहीं रहता आखरी बार कब नहाया था
उसको छूने के लिए वज़ू करने लगा हूं मै।

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