गुज़ारिश

सुनो !
मौसम आज इश्क फरमा रहा है,
तुम ज़रा महसूस करके तो देखो ;
हवाएँ सर्द, और महफिल रंगीन है,
तुम इस्तकबाल क़बूल करके तो देखो!

आँखें नम है; धड़कने तेज़,
तुम आहट सुनकर तो देखो ;
तुम्हारी गर्दिश में यूँ ही समा जाएंगे,
तुम मुस्कराकर तो देखो!

चाँदनी रात के साए में नहीं,
सर्दी की महफ़ूज़ धूप में ;
दुनिया की नज़रों से दूर नहीं,
हर रिश्ते, हर औधे, हर मनज़र के सामने,
तुम हक से हाथ थामकर तो देखो!

इशारों में नहीं, चंद लफ्जों में ही सही,
तुम इज़हार करके तो देखो ;
चेहरे के नकाब से नहीं,
आँखों की गहराई से,
हमें पहचानने की कोशिश करके तो देखो!

गुज़ार रहे हैं पल, इन्तज़ार में,
तुम फ़ुरसत में याद करके तो देखो ;
एक बार ही सही,
तुम भी हमसे इश्क फ़रमाकर तो देखो!

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