गैर जमानती है इश्क मेरा

गैर जमानती है इश्क मेरा, ठहर जा
जो इक बार कैद मे आया तो रिहा न हुआ

वो तुम जैसो का इश्क होगा जिसे लोग भूल जाते है
मुझसे बिछड़ जो भी गया उसका बिहा न हुआ

कुछ तो ऐसे थे सुहाग-रात मे उनके ख्याल मेरा
पाकर जहाँ भी जिनका मुकम्मल जहाँ न हुआ

मुझको ठुकरा कर चले जाना मगर याद रखना
जहा भी दशतखत हुआ वो कहीं का न हुआ

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