जीवन की सीख

इस कोरोना से दिल घबराता है, अपनों को खोने का ख्याल ना चाह के भी कई बार दिल में आता है।
डर लगता है कि ना जाने कल कैसा होगा, क्या और बढ़े आंकड़े, न्यूज चैनलों में यही सुनने को होगा।
पर इस सबके बीच, मैंने इस करोना से कुछ तो सीखा है।
जो सबसे दूर रहना चाहता था कभी, अब वो दिल अकेलेपन के खयाल से भी घबराया है।
अगर ये हुए आँखिरी पल, तो अपनों को जी भर के गले ना लगा पाने का गम दिल में छाया है।
कुछ तो हैं जिनसे कितना प्यार है सुनना और बताना चाहती हूं,
और कुछ लोग हैं ऐसे, जिनसे दूर थी, दूर हूं, और दूर ही रहना चाहती हूं।
कीमत मालूम पड़ी वो एक एक बर्बाद करी कभी जो रोटी थी, आज मम्मा डायट पर हूं ये कह के जब में सोती थी।
मालूम पड़ा फिक्र करना क्या होता है,
जो तन्हाई की बातें ऐसे ही करती थी, उस तन्हाई में असल में जीना क्या होता है।
कहना है कितना क्या कुछ, उसको तो अभी दिल का हाल भी बताना रहता है,
जो रह गई थी उसकी मेरी बातें अधूरी, अभी उनको पूरा भी करना रहता है।
जो कभी लगती थी बड़ी तकलीफें, वो सब अब मामुली इसके सामने लगती है,
इस सब का खुदा ने क्या एहसास कराया, लगता है हमारा हाल देख कर अब कुदरत भी हम पर हंसती है।

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