तरकीबें और तकलीफें

तरकीबें और तकलीफें
दोनों अजीब टाइम पे आती हैं।

कभी रात की जाएगी, यादों में खोयी,
चाँद भी थक कर सुबह हो गया।
उस रास्तों में मेरी कहानी है,
जहाँ हम आखिरी बार मिले थे,
याद है ना, या तुम रात में सो गए थे?

दीवारों का रंग बदल गया है,
या शायद आज पहली बार उसपे नज़र गयी है,
तुम्हे भूलने में महीने निकले,
शायद तुम्हारा भी रंग बदल गया है।

हलकी सी धुप रूम में आती है,
तो सोचती हूँ उसे भी क़ैद कर लूं।
क्या पता फिर सुबह कब आएगी,
ये रात भी काफी लम्बी जो है।

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