तराजू

तू सच्चा है! वो साथ है|
तू झूठा है! तो घात है|
वो कर्म काल आएगा
बुरो को मार गिराएगा||

ना अस्त्र है!
ना शस्त्र है!
तेरे कर्मों का ही
तुझपे यह हश्र है||

क्या पाया है,
क्या खोएगा तू
वह तो सब स्पष्ट है||

जब जन्म लिया ही है,तो
प्रारंभ से फिर क्यों डरें?
बस कर्म करें और संग रहे|
फिर अंत से भी क्यों डरें?

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