तुम्हें पता है क्या

खूबसूरत हो तुम
तुम हसीन हो
पर तुम्हें पता है क्या तुम मेरी नाज़नीन हो

तुम्हें पाने की जिद थी
कोशिश की और वक्त भी लगा
क्यूंकी तुम तो आसमां थी
पर तुम्हें पता है क्या तुम अब मेरी ज़मीन हो

हर वक्त सींचता हूँ तुम्हें
अपने प्यार की बूंद से
पहले तुम सिर्फ अच्छी थी
पर तुम्हें पता है क्या तुम अब बेहतरीन हो

जब पाने की चाह थी
ख्वाबों में ही सही हर वक्त तुम साथ थी
हर कदम लगा तुम एक सुंदर मुकाम हो
पर तुम्हें पता है क्या तुम अब मेरी ज़हनसीब हो

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