नई उड़ान दे

क्यों है बेटी का काम घर का समाधान
वह पढ़ लिखकर बढ़ा सकती है भारत की शान

जैसे महिलाओं का अधिकार है आदर और सम्मान
बेटियों को मिलना चाहिए पढाई का ज्ञान

ईश्वर ने दिया है माता पिता का दर्जा
समझिये इस बात को और मत महसूस कीजिये लज्जा

तकलीफ होती है उस बेटी को जिसने समेटें है उसके सपने
दूसरों को क्या कहें , जब समझ न पाए हमारे ही अपने

दिल को समझाकर , मन को बेहलाकर चलती है वह औरों की डगर
ना जाने कब समाज बेटीयों को पढ़ने देगा उनकी ताकतें समझकर

एक बार तो खुद से पुछे की क्या उसके कोई सपने नहीं
एक बार तो खुद से पुछे की क्या आप उसके अपने नहीं

सूरत से वह लाडली प्यारी
कहते हैं उसके अपनी लाडली दुलारी

शायद बन जाए वो आत्मनिर्भर नारी
शायद चुका देह वो आपकी उधारी

कैद में ही उसकी जिंदगी, चलिए उसे आज़ाद कर दें
पिंजरे में बंद सपनों को एक नई उड़ान दे

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