पुनर्योदय

प्रगतिशील परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध हूँ
प्रयास पूर्ण हो गर प्रारंभ में शुद्ध हूँ
प्रारब्ध की बातें तो प्रभु ही जाने
मैं तो कर्म प्रणेता प्राणी प्रबुद्ध हूँ
प्रासंगिक परिणाम की परिकल्पना है
परिष्कृत अंतःकरण का सपना है
पुरुषार्थ को पुनः प्रस्तुत करते हुए
प्रबल भारत का निर्माण करना है
प्रत्येक जीव से प्रेम करूंगा
प्रभु शरण में शीश धरूँगा
प्रकृति के पावन पल्लू में
पूजित जीवन का उदय करूंगा

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