‘प्रेम की परिभाषा’

बचपन से ही मुझे उन मूवीज से सख्त नफरत थी,
जिनमें “लव एट फ्स्ट साइट” को दिखाया जाता था,
मैं यह मानने को कभी तैयार ही नहीं थी कि
पहली नज़र में भी ऐसा कुछ हो सकता है।

क्योंकि मैंने अपने मन में प्रेम की परिभाषा को
“लव एट फ्स्ट साइट”को न चुनकर
“आँखों की गुस्ताखियों” से होकर धीरे धीरे बढ़ने वाले
ज़ज़्बातों को चुना था।

परंतु वो होता है न कि जब तक हम चीजों को
खुद महसूस नहीं करते, उनकी सुंदरता हमसे परे रहती है।

हाँ, सही सोचा, मेरे साथ शायद ये “लव एट फ्स्ट साइट”
वाला सीन ही हुआ था,
तब कभी कभी परिभाषा बदलने का मन ज़रूर किया,
तो सोचा इनफैचुएशन है, और परिभाषा को वैसे का वैसे ही रहने दिया।

मैंने तुम्हारे साथ होने का हर वह मौका खो दिया,
और तुम्हारे चले जाने के बाद यह एहसास हुआ कि
मैंने किसी अजनबी को नहीं किसी अपने को खोया है,
और यह भरपाई कभी नहीं हो सकती।

तब एहसास हुआ कि प्रेम की अर्थ कोई
“लव एट फ्स्ट साइट” या “आँखों की गुस्ताखी” नहीं होता।

प्रेम की तो कोई परिभाषा ही नहीं होती।

प्रेम सिर्फ एहसास होता है, जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है

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