बचपन

इक बचपन जो ख़ास है,
उम्र नहीं एहसास है।
खेल खिलौने और पहेलियाँ,
इन यादों पे नाज़ है।

इक नन्ही फूल-सी,
ख्वाब सजाये धुल-सी,
मिट गयी जो लगी पकड़ने,
दिल में अब तक राज़ है।

स्पोर्ट्स, ड्राइंग, और पढ़ाई,
इन तीनो ने रेस लगायी।
क्या इन सब का बैलेंस कम था,
जो लाइफ ने मेरी वाट लगाई।

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