बिखर जाऊं क्या

हवा में बदल कर तेरी सांसें बन जाऊं क्या?
तू मेरी मिठास बन जाए, किसी ऐसी आवाज़ में बदल जाऊं क्या?
कतरा-कतरा समेटा है तेरी नज़दीकियों ने मुझे,
अब क्या फिर से कलम की खातिर बिखर जाऊं क्या?

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