भोर का मिलन

प्यार दो दिलो के मिलने से शुरू होता जरूर है पर अपनों- परायो के रूठने मनाने के उलझन में कुछ यूँ गिफ्तार होता है की मानों उस को पाने का कोई रास्ता ही ना बचा हो मेघा से बात करते हुए मलय ने खुद को आईने में देखा.. अजीब सा चेहरा मानो सामने आ गया हो , जैसे ये चेहरा उस का हो ही न.!

“तुम को मनाते – मनाते मे न जाने कितने, अपने रूठ गये सोचता हू तुमको मना लूंगा तो…. हम दोनो मिलकर….सारे अपनो को मना लेगे..!

मुझमे डर भी लगता है..मेघा”

“मेघा तुम सुन रही हो ना” ..आज मॉ- पापा ने भी कह दिया   “करो अपने मन का जो करना है अब तुम मेरे लिए कुछ नही हों तुम्हारी जवानी और मेरा बुढ़ापा दोनों अब एक साथ नही बीत सकते,

हम तुम्हारी शादी मे नही आयेगे और ना ही तुम उस कलमुँही के साथ इस घर में आना जाओ रहो जहाँ रहना है , 

एक कपूत जना था हमने सोच लो मर गया वो आज से

रमा , आज के बाद इस नालायक की तस्वीर तो क्या नाम भी कोई ना लेना इस घर में.”

एक क्षण को मलय एकदम शान्त हो गया

तुम कुछ तो बोलो यार…तुम्हारे लिए ही सब से अलग चल रहा हू…और तुम यू खमोश हो…!

“मलय मै क्या कहू…धीमी सी आवाज आई..”

हमारे जज्बात अगर हमारे अपने समझते तो  हमको..इतना सब को इतना समझाना न पड़ता…चार सालो का है हमारा रिश्ता सभी जानते है”

मलय …”मै तो शादी के बाद भी, अगर तुम चाहते हो कि हम तुम मिलकर….सब को मना लेगे तो मै तुम्हारे साथ हू..!

“मेघा पापा बोलते है एक लड़की के आगे उन का प्यार कम पड़ गया जो मैं तुम को चाहने लगा..?”

“यार प्यार में कम – ज्यादा क्या होता है मैं उनको भी बहुत प्यार करता हूँ और तुम को पर दोनों का स्थान तो अलग – अलग है ना.?” 

“हाँ” ये लोग प्यार की तुलना क्यों करते है उसको नाप-  जोख के माँ – बाप साबित क्या करना चाहते है”

“प्यार जब रिश्तों को पूरा करता है तो प्यार के नाते रिश्ते टूटते क्यों है मेघा ,

मेघा  ” हमसे अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार छीन कर ये हमारे परवरिश का रौब क्यों बताते है ,

हमें पैदा करना,  हमारा जन्म , हमारी परवरिश क्या प्यार के अतिरिक्त कुछ और थी जो आज ये उसकी कीमत माँगने लगते है, प्यार  है कहाँ मेघा.? “

“नही यार  बस यूँ ही बोल दिया होगा,  वो हमारी जिंदगी है तो हम भी उनकी जिंदगी है..!

इतना क्यों परेशान होते हो,  सब ठीक हो जायेगा”

“हाँ कोशिश तो वही है पर आज मैं बहुत कंफ्यूज़ हूँ”

मेघा मैं कई महीनो से अन्दर – अन्दर घुटने लगा हूँ 

आज प्यार की इस उलझन को सुलझाना है तभी चैन मिलेगा,  अब ताज़ी हवा में साँस लेना चाहता हूँ..!

वैसे तुम अभी हो कहाँ किसी दोस्त के घर पे”

“नही अभी तो रेलवे स्टेशन पे बैठा हूँ ” किसी दोस्त को भी तकलीफ कैसे दे दूँ  क्या पता फिर क्या रिऐक्शन हो उनके घरों में”

“तो फिर क्या करना है अभी रात के 12 बज रहे है 

खाना खाया”

नही यार खाना क्या अब तो कुछ खाने का मंन नही है कुछ समझ नही आ रहा क्या करूँ

यार प्यार ही तो किया है, क्यों ऐसा कर रहे है लोग हमारे साथ , जो उनके हिसाब से शादी करते तो सब ठीक जो ख़ुद करे तो पाप क्यों होता है”.

मेघा हमारी ख़ुशी में हमारे माँ बाप खुश क्यों नही होना चाहते,

“ये जाति , घर्म ,ऊँच ,नीच का आडंबर जो है वो चाह के भी समझना नही चाहते मलय,

“ये सब बातें छोडो अभी क्या करना है कुछ सोचो”

“क्या सोचूँ मेरा तो दिमाग काम ही नही करता है अब,

मेघा शादी तो करनी है ना मेरे से”

“क्या अब भी ये प्रश्न है मलय हाँ करनी है तुम जब कहो जहाँ कहो करनी है”

एक बार और सोच लो शायद आज के बाद फिर मौका ना मिलें 

यार अब सोचने की और मौके की जरुरत नही है मैं दिल पे तुम्हारा नाम लिख चुकी हूँ

फिर भी सोच लो मैं 10 मिनट बाद फ़ोन करता हूँ

शायद आज बहुत बड़ा दिन है…!

मलय नेें फ़ोन काट दिया और पानी की बोतल से कुछ घुट पानी गले में उतार लिया, रोती आँखो से चश्मा हटाया और मुँह धोया बेंच पे बैठते ही जेब से पर्स निकाला देखा तो 500 रूपये थे ,

पर्स में ऊपरी तरफ पापा- मम्मी की तस्वीर थी कुछ पल एक टक उन दोनों को देखता रहा , बचपन से आज तक की मानो सारी बाते आँखो के आगे तैर गई हो आज पापा और माँ की हजारो बातें उसकी कानों में गूँज रही थी,

वो बातें ना जाने क्यों उसे इतना मजबूत बना रही थी फोटो को माथे से लगा उसने पर्स को जेब में रख लिया

सर को ऊपर आसमान की तरफ किये वो कुछ बुदबुदाने लगा,

इस काली रात में एक अजीब सी चमक आ गई उसके चेहरे पे वो तेज जो कभी नही था उसमें वो हिम्मत जो आज ना जाने क्या करवाने जा रहा था उस से

हाथ में फ़ोन पकडे वो स्टेशन से बाहर आ गया देखा तो 1.30 बज रहे थे

मेघा का no मिला दिया , उसने फोन उठाया

“मेघा” सोचा तुमनें 

“क्या शादी के बारे में”

“हाँ”

“करनी है यार क्यों पूछ रहे हो इतना आज ,बोलो कब करनी है” इस फैसले पे जिंदगी में कभी अपने आप को कोसू गी  नही, रह कर सह लुंगी सब कुछ पर शादी तुम से ही करनी है”

“अच्छा फिर अभी आओ कमला नगर वाले अम्बे माँ के मंदिर में हम अभी शादी करेगें”

“क्या ,क्या बोल रहे हो मलय..!”

हां , आज शादी करेंगे आओ क्यों कोई प्रॉब्लम है”

“प्रॉबल्म, प्रॉब्लम , नही तो कुछ नही”  वो चंद पल शांत हो गई,

मलय पर कुछ सोचा नही था ऐसा इतनी जल्दी”

“देखो मेघा ना तो मैं अपनों को खोना चाहत हूँ और न तुम को खोने की हिम्मत है मुझमे 

यही रास्ता है मेरे पास मेरे पे विश्वास है तो आज आ जाओ”

कुछ पलो को फ़ोन पे फिर सिर्फ सन्नाटा था ये कुछ पल मेघा की जिंदगी के सबसे मुश्किल पल थे,

फिर एक आवाज आई “ठीक है मेरे घर के पास मुझसे मिलो आज तुम्हारा ही हमारा फैसला है”

‘ठीक है फ़ोन ऑन रखना”

“हूँ ,मेरे पास कुछ है नही मलय एक भी पैसा नही है”

“दिल है ना मेरा वही काफी है , आ जाओ ..!

हजारो विचारो से घिरी मेघा के उन पलों में शायद कुछ सोचना नही चाहती थी आज वो अपने दिमाग़ को बंद कर सिर्फ और सिर्फ अपने दिल की सुनना चाहती थी, अपने प्यार पे अगाध भरोसे ने उसको वो ताकत दी थी वो उठी मुँह धोया और भगवान् को नमन् किया,

एक बार माँ को देखा  आँखो में आँशु जरूर थे पर पैर डगमगा नही रहे थे, कोई डर भी नही था ये भरोसा था उसका मलय पे , पापा आगे वाले कमरे में सोये थे उनको एक नज़र देख के वो गेट पे आ गई 

दरवाज़ा खोला बाहर निकली, बाहर से ताला लगा दिया और चाभी घर में फेंक दी..!

वो सड़क पे थोड़ा आगे आई की मलय दिखाई दिया वो दौड़ के उस से लिपट गई , सड़क पे आज कोई शर्म नही लगी उसको..!

“तो क्या हम भाग के शादी करेंगें” मलय

नही हम भाग नही रहे हम तो वापस जाने का रास्ता निकाल रहे है , हम शादी कर के अपने आप को और अपने प्यार की पवित्रता को सही साबित कर रहे है,

हम बालिग है हमें अपना प्यार चुनने और अपने माँ -बाप का प्यार पाने का पूरा हक है..!

आज पहली बार मेघा को एक नया मलय दिख रहा था जैसे आज उसके पापा मलय में दिख रहे हो , आज के अंश में सब कुछ पूर्ण था वो अब कुछ सोचना समझना नही चाहती थी वो तो इस प्यार की नदी में बहना चाहती थी,

रात के उस भोर के प्रहर में उनके कदम बड़े ही मजबूती से आगे बढ़ रहे थे दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा था सामने मंदिर आ गया ,  

आज 4 बजे उस मंदिर में दो नश्वर शरीरों की शादी और दो दिलो का संगम हो रहा था, 

प्यार सही गलत के तराजू में तोलने की चीज नही है वो तो सिर्फ जीने का एहसास है , हर फेरे में प्यार जीत रहा था प्यार की ताकत में उनको अब कोई भय नही था,

था तो सिर्फ विश्वास की उनका प्यार अमर है और वो इस प्यार की पवित्रता का एहसास सब को करा के 

सभी अपनों को फिर से पा लेंगे,

चलो मेघा अब घर चलते है आज से हम एक है और हमारा प्यार सब को एक करेगा, 

चलो घर चलते है , मेरे घर जो अब तुम्हारा भी है अपने घर चलते है..,

जो 500 थे वो पंडित को दे दिए थे दोनों नव दम्पति हवाई चप्पल में पैदल ही घर को चल दिए  वो जानते थे हजारो काटे अभी और है राहो में पर अब वो तैयार थे 

इस ब्रम्ह मुहूर्त में उन दोनों ने ना सिर्फ एक दूसरे को पाया था बल्कि अब उनके पास रास्ता भी था, मंजिल भी थी और उस पे चलने की हिम्मत भी,

मलय ने एक गहरी सांस ली अब हवा ठंडी और बेहद ताज़ी लगी उसको कई महीनो के बाद आज वो इतना आज़ाद महसूस कर रहा था,

मंदिर की सीढ़ियां उतरते वो धीऱे धीऱे वापस जाने लगे जब आये थे तब रात थी , घनी काली रात और अब सूरज की पहली किरण उनका रास्ता दिखा रही थी 

मेरी आँखों से ओझल होते हुए वो एक साथ नई मंजिल की ओर बड़ चले थे जहाँ उनके अपने थे….!

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