माँ की थाती

तारे गिन गिन

तारे गिन गिन,

माँ कहती है

बेटा सो जा।

करवट लेकर

उलट पलट कर,

कर कोशिश

झटपट सो जा।

माँ के नयनों को

जब जब देखूँ,

वह नील गगन 

से मुझको लगते।

अटखेली में 

माँ  की चोटी,

जैसे काले बादल ढलते

तो काले बादल बनते।

माँ की बिन्दी

चांद को ढकती,

मुख मंडल को मेरे

रोशन करती।

माँ की ममता 

मेरे मन को

अन्तर मन तक 

दीपित करती।

माँ कहती फिर

बेटा सो जा,

कहे अगर तू

तारें ला दूं।

तारों को देख

मन उड़ता जाए,

करवट बदलूं तो

माँ मुस्काए।

माँ की मुस्कान 

है इतनी प्यारी,

नींद उड़ा दे

सारी की सारी।

आफत बड़ी है

नैनों से झड़प,

माँ ना समझे

मन की तड़प।

नैनों को झप्पी

मन की थप्पी,

बहुत कठिन है

माँ की थाती।

Comments

  1. Prince

    मां की थाती,बहुत ही सुंदर शीर्षक है इस कविता का और कविता की पंक्तियां भी उतना ही भावनात्मक है ,बहुत सुंदर लिखा है आपने

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