मासूम उड़ान

कलकल बहती ,गिरती-उठती धार है तू।
तू नई नवेली चंचल शीतल, उठ पंख पसारे,
उड़ चल फुर्र उड़, नीयति का श्रृंगार है तू।
चीं चीं कर तू बुला आसमां, स्वच्छंद नया सा खुला आसमां।
भय न कर इठलाती उड़, तेरे भी हैं यह धरा आसमां।

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