मुझसे ना सही

तू यहीं तो है, फिर क्यों मुझे दिखे नहीं,
इन साँसों में तेरी खुशबुएँ पनप रही।
तेरी जुल्फों से जो रौशनी छन कर आती थी,
वो मेरे लबों की गर्माहट बन चुकी।

जाँ मेरी घबराई रहती,
हर पल बस ये कहती रहती,
मुझसे ना सही, मेरी आंखों से तो मिल।

रूह मेरी मुरझाई बैठी,
क्यों ना उसमें तू अब रहती,
मुझसे ना सही, मेरे जज़्बातों से तो मिल।

रंगों से तेरे ही मिटते अंधेरे मेरे,
ख्वाबों से तेरे ही खिलते सवेरे मेरे,
परछाइयों से तेरी कैसा रिश्ता बना,
अंधेरा भी अब तो उजाला सा लगने लगा।

तेरी बाहों में मैं मर कर तेरे दिल में ज़िंदा रहूं,
तेरी चाहतों के समंदर में सदियों तक बहता रहूं।

दिल ये मेरा मुझसे बोला,
क्यों मेरी शिद्दत को तोला,
मुझसे ना सही, इन धड़कनों से तो मिल।

ये सांसें गुमसुम सी रहती,
क्यों ना इनमे तू अब बहती,
मुझसे ना सही मेरी बाहों से तो मिल।

मुझसे ना सही, इन अल्फाज़ों से तो मिल।

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