मुझे भी जरा बताना

हर सुबह कानो में बजे तेरी चीख,
अगर कुछ गलत करू तो बोलती,
“दूसरों से कुछ सीख”
अगर में जिद्द करू,
तो हो गया हु ढीठ!
पर मेरे घिसे-पिटे कपड़ो को,
कैसे कर देती है तू ठीक|
सिंगर न होते हुए भी,
किचन में रोटी पकाते वक्त
तेरा वोह मधुर गीत गुनगुनाना,
इसका क्या राज़ है, मुझे भी जरा बताना||

मेरे ग़लती पे मुझे समझाए,
और दुःख में मुझे सिखाए,
कैसे सुखी होना|
मुझे सही राह वोह दिखाए,
दर्द के वक्त वह बताये,
कभी मत रोना|
लेकिन कैसे है अपना इतना अलग याराना,
इसका क्या राज़ है, ये मुझे भी जरा बताना,
तेरे फ़ोन की सीरियल कभी मुझे भी दिखाना,
दाल तड़का, माखन रोटी
कभी मुझे भी सिखाना|
तुझे अच्छे से आता है
परेशानियों को मेरे रास्ते से हटाना,
इसका क्या राज़ है,मुझे भी जरा बताना||

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