यकीन

सांसो में उलझी जिंदगी अब एक दाव है,
डर से तड़प रहा ये जहां है |
ये महमारी का जाल फेला चारो और है |
जिंदा रहना का बास एक ही उपाय है।
घर पे सुकून है, दुरी ही तुम्हारी जीवनदान है।
खो दिया है किसीने अपने तो दिया किसीने जीवन है |
कठिन है ये लड़ाई,
पर अब इलज और दवा दोनो है।
आज आया ईद का चांद है, हाथ जोड़ दुआओं में,
“ऐ खुदा,
आज अजनबी भी कर रहा अजनबी की मदद”
क्या खूब ये नज़ारा है,
इंसानियत से ही जीतेंगे हम ये जंग,
जल्द ही आएगा एक नया दौर है।
गिनती है बस कुछ पल की,
खुशियों का लम्हा फिर से आएगा- ये हम सबको यकीन है।

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