रंग बिरंगे ख़्वाब

धूल जमी हटेगी,,धुंध के साये भी छँट जाएंगें और ..,पत्तियों, शाखों से फिसलती रोशनी कालिख चीरती हुई ,जब बह जाएगी मेरे आंगन में । मैं भी ख्वाब सजाउँगा ,फिर सुफेद सी एक चादर पर,,, रंग बिरंगे ,उजले उजले …नीले पीले, हरे भरे।

📷&🖋 अमरीश सैनी 🌿

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