‘लड़का -लड़की’

जब कभी लोग ये कहते हैं न कि लड़का लड़की दोनों एक बराबर हैं,
तो वह बिल्कुल गलत हैं, मुझे ये बात कहीं भी सही नहीं लगती।

अरे, तुम लोगों को क्या ये बात समझ नहीं आती क्या कि
लड़का लड़की दोनों एक जैसे नहीं होते,
भगवान ने दोनों को अलग बनाया है
सूरत और सीरत दोनों में ही, दोनों में बहुत अंतर है।

तो अगर मैं ये कह रही हूँ कि लड़का लड़की दोनों में
बहुत फर्क है,
तो मैं कहीं भी गलत नहीं हूँ,
अगर गलत है तो दोनों में से किसी एक को बड़ा या छोटा समझना ।

तो हाँ, मुझे ये कहते हुए बिल्कुल शर्म नहीं आती कि दोनों में बहुत फर्क है।

और हाँ, मैं बेटी हूँ, तो मुझे बेटी ही रहने दो,
मुझे बेटा मत बनाओ, मुझे बेटा कहकर मत बुलाओ,
यदि आप अपने बेटे को बेटी कहकर नहीं बुलाते,
तो बेटी को बेटा क्यूँ?
मुझे सिर्फ एक बेटी ही रहना है, बेटा नहीं बनना।

अगर मैं तुम्हारी दोस्त हूँ, तो मुझे “ब्रो” कहकर भी मत बुलाओ,
“Cuz I’m not your bro, I’m a girl”

तुम लोग ये कहते हो कि हमारी बेटियां बेटों से कम हैं क्या?
पर तुम लोग ये कभी नहीं कहते कि हमारे बेटे बेटियों जैसे हैं।
तो हो सकता है सबसे ज्यादा गलत तुम लोग ही हो।

तुम बेटियों को यदि बेटा कह रहे हो तो लड़का लड़की में तुम
एक तरह से भेदभाव कर रहे हो,
और शायद, शायद नहीं हाँ, ऐसे में तुमसे ज्यादा गलत और कोई नहीं है।

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