वक़्त की पुकार 

ये वक़्त की पुकार है,

सब ओर फैला अन्धकार है।

वक़्त की गर्जना सुन, 

यह बहुत बलवान है।

ना कर इसकी अलोचना,

ना दे ये कोई सूचना।

यह बस देखता कर्म है,

सही-गलत क्या धर्म है।

यह साक्षी है पूर्व काल से,

ना बचा कोई महाकाल से।

खुद को बलवान बताने वाले,

या अपनी हस्ती स्वयं बनाने वाले,

काल का चक्र जब घूम जाएगा,

सबकुछ मिटता नज़र आएगा।

वक़्त की अद्भुत माया का,

विचित्र विश्लेषण क्या करूं,

इसे समझना है कठिन, 

और मैं इसपे क्या कहूं।

प्रेम की ज्वाला दहकती रहे,

जिससे धरती महकती रहे।

अभिमान का त्याग करो,

हर वक़्त सीख को याद करो।

जीतने की मनसा साथ रखो,

वक़्त के हाथों पे हाथ रखो।

हार जाने पे झुकना नही,

गिर जाने पे रुकना नही।

जब काल पलट कर चहुं ओर देखेगा,

सब ठीक-ठीक वैसे ही हो जायेगा।

Comments

  1. Prince

    वक्त ही महान है ,बहुत ही सत्य है ,बहुत ही सुंदर लिखा है आपने

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