शून्य

एक सार्थक सत्य ,
जो मनोभावों को स्पर्श करता ,
शास्वत चिरंतन विषयों में समाहित -.
गणित की महत्ता बताता ,
धरा से सुदूर गगन में चिन्हित –
शुन्य का विज्ञान समझाता ,
अंतर्मन की गहराइयों में जाकर –
सुप्त भावों को जीवंत बनाता ,
सत्य असत्य , सही गलत ,
सीमित , असीमित ,
मूल्यों का सही आकलन कर –
विश्वास से परे आवर्धित ;
अंको की सार्थकता –
या ब्रह्माण्ड में समाहित विज्ञान का –
एक अप्रतिम सूचक बन ;
हरेक परिभाषा के सीमा से परे –
सार्वभौमिकता का एक अभिप्राय शुन्य !!
स्वरचित @ निशीथ सिन्हा

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