हम होंगे कामयाब

तू ना तोड़, ना छोड़ उम्मीद कि यह वक्त भी ढल जाने को है,
हाथ थाम, सब्र कर कि सुबह भी एक दिन आने को है |

है इम्तिहान ये कुछ दिनों का फिर सब ठीक हो जाने को है,
आंसुओ की डोर, ये फसलफे भी एक दिन मिट जाने को है |

नगमे फिर वही पुराने, तराने वही दोहराएं जाएंगे एक बार,
रख सब्र, ये कुछ बेरंगीन महफ़िल भी एक दिन जाने को है |

बन जाती है रोज कोई जीस्त एक अखबार की खबर,
दोस्त, यकीन कर ये दौर भी एक दिन चले जाने को है |

ज़ंजीरें ये जो जकड़ी है, थाम रक्ति है रफ़्तारूं को,
मान जा ये ज़ंजीरें भी एक दिन टूट जाने को है |

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