ग़ज़ल

छोटी खुशियाँ तूलानी ग़म
अक्ल ओ दिल रक़ीब बाहम

खूंचुका है जिगर मेरा
जहाँ ज़मिंबोस तेरे क़दम

न मौजूद है वो नवाजूद है वो
वले बुतखाना वले हरम

क़िस्मत में दो इबारात फ़क़त
अबके जुदाई हिज्र अगले जनम

तस्सवुर ए माशूक़ ख़ूब अजब
आंखे ख्वाबीदां नींद ख़तम

जूनून ए इश्क में अब दीवान होगा
खून रौशनाई अंगुश्त क़लम

मेरी शहरग में मिलती होगी
ये जो तेरे दस्त पे है रग ए नीलम

बंदगी में कमज़र्फ समझा!
काफिर हुआ तो मिला सनम

कंद अज़ शिरींतर अस्त तर्ज़ ए गुफत ए मुहब्बत
जान जानूं जानां अज़र जानम

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