‘लड़का -लड़की’

जब कभी लोग ये कहते हैं न कि लड़का लड़की दोनों एक बराबर हैं,तो वह बिल्कुल गलत हैं, मुझे ये बात कहीं भी सही नहीं लगती। अरे, तुम लोगों को क्या ये बात समझ नहीं आती क्या किलड़का लड़की दोनों एक जैसे नहीं होते,भगवान ने दोनों को अलग बनाया हैसूरत और सीरत दोनों में ही, …

‘प्रेम की परिभाषा’

बचपन से ही मुझे उन मूवीज से सख्त नफरत थी,जिनमें “लव एट फ्स्ट साइट” को दिखाया जाता था,मैं यह मानने को कभी तैयार ही नहीं थी किपहली नज़र में भी ऐसा कुछ हो सकता है। क्योंकि मैंने अपने मन में प्रेम की परिभाषा को“लव एट फ्स्ट साइट”को न चुनकर“आँखों की गुस्ताखियों” से होकर धीरे धीरे …

‘काल्पनिकता’

किसी दिन मीरा अपने हॉस्टल से घर वापिस आ रही थी,तभी बस में बैठे हुए उसे एक आवाज़ आई, “ दीदीकुछ दो भूख लगी है “पर मीरा के खुद के पास केवल 250 रुपये थे, जो केवल उसेघर तक पहुंचा सकते थे,मीरा तभी उदासी भरी मुस्कान से उसकी तरफ देखते हुए कहने लगी,“ मेरे पास …

‘एक सवाल

क्या हमें एक दूसरे से नफरत करनी चाहिए?पता नहीं। मुझे सिर्फ इतना पता है कि हमें एक ही इंसान कीमासूमियत से प्यार हुआ था,हम दोनों ने ही अपनी सारी हदें तोड़कर उससे प्यार करना शुरू किया था,हम दोनों ने एक ही इंसान में प्यार ढूँढना चाहा था,फर्क सिर्फ इतना है कि मैंने ढूँढा और तुमने …

तुम्हारे जैसी सुंदरता

तुम्हारे जैसी सुंदरता कहाँ से लाऊँ?कहाँ से लाऊँ तुम्हारे जैसी मासूमियत?तुम जिस तरह प्रेम करते थे,वह प्रेम कहाँ से लाऊँ? तुम तो मुझसे कहते थे किमैं किसी का भी हृदय चुरा सकती हूँ,पर अब मैं तुम्हें तुम्ही से कैसे चुराऊँ?

‘स्वार्थ’

क्या कभी ऐसा हो सकता है कि ये समाज किसी के द्वारानासमझी में हुई एक गलती को भूलकर उसकी अच्छी बातोंको याद रख फिर से उसे पहली वाली नज़रों से देखे? शायद नहीं, ऐसा कभी नहीं हो सकता,ये शायद हम इंसानों की ही प्रवृत्ति है किहम अच्छी चीज़ें नहीं, बल्कि बुरी चीज़ें याद रखते हैं।हम …

‘खत’

डियर फ्यूचर लव,तुम हमारी पहली डेट पर मुझे किसी कैफे या मूवी पर मत लेके चलना,तुम मुझे किसी शांत सी जगह, शहर से कहीं दूर लेके चलना। तुम तोहफे में मुझे कोई ड्रेस या फूल मत लेके आना,क्योंकि चीजों के सस्ते महंगे होने से रिश्तों में दरारें aa जाती हैं,और फूल, फूल तो मुरझा जाते …

‘लग जा गले’

सुनो, तुम्हें नहीं लगता तुमने कुछ ज्यादा जल्दी ही खतम कर दिया,अभी थोड़ी और बातें हो सकती थी,अभी थोड़ा और अधिक एक दूसरे में खो सकते थे,अभी थोड़ी और अधिक एक दूसरे की पसंद नापसंद जान सकते थे,अभी हम इस रिश्ते को थोड़ा और संभाल सकते थे,पर तुम्हे नहीं लगता तुमने इसे पकड़ भी छोड़ …

निस्वार्थ प्रेम

मुझे निस्वार्थ प्रेम चाहिए,हाँ, मुझे इस बार निस्वार्थ प्रेम चाहिए,क्योंकि अब मुझमें और अधिक टूटने की क्षमता नहीं है। इस प्रेम को मैंने अपने हर सगे-संबंधी अपने प्रेमी में ढूँढना चाहा,पर अंत में हार ही पायी,परंतु कुदरत का खेल तो देखो,इस निस्वार्थ प्रेम की तलाश में खुद से ही प्रेम कर बैठी

मुझे डर है

मुझे डर है कि कहीं वह दिन न आ जाए,जब मैं मुसकुराना ही भूल जाऊँ,मैं भूल जाऊँ कि किस तरह आखिरी बार मुसकुराई थी,और किस वजह से मुसकुराई थी। मुझे डर है कि कहीं मैं ये न भूल जाऊँकि किस तरह कोई मुझे मेरे रूठ जाने पर मनाता था,मुझे डर है कि कहीं मैं इन …