Beta- beti ek saman

हमे तो इस बार पोता ही चाहिए,अगर अबकी बार लड़की को जन्म दिया तक उसका गला घोटके मार दूँगी। सरला की सास ने उसको घूरते हुए देखके बोला। मानो जैसे सरला की सास की आँखों मे खून उत्तर आया हो।
सरला महज 17 साल की थी जब उसकी शादी हुई थी। सरला और उसका पति सावन काफ़ी ग़रीब परिवार से थे,सावन पानीपुरी बेचके अपना ओर अपने परिवार का पेट पालता था।सरला की सास के जैसे ही उज़के पति सावन की भी एक बेटे की ही इच्छा थी। जिसके चलते अब तक वो दोनो 3 लड़कियों के माँ बाप बन चुके थे।
सरला अब चौथी बार पेट से थी। उसको मन ही मन काफ़ी डर था कही इस बार भी अगर लड़की पैदा हुई तो उसके ससुराल वाले,उसका पति बच्ची को मार देंगे। पर शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था अबकी बार । प्रसुति में अभी एक महीना बाकी था कि उन्ही दिनों सरला की सास का बाथरूम में पैर फिसल गया और एक पैर टूट गया। ओर उसने बिस्तर पकड़ लिया। सरला की तीनों बेटियों का अपनी दादी से लगाव बहुत था,पर उनकी दादी अपनी पोतियों को बिल्कुल पसंद नही करती थी।
अपनी दादी को इस तरह दर्द में देख तीनो पोतियां दादी का ओर भी लाड़ करने लगी,उसका ख़याल रखने लगी। कहती, दादी आप जल्दी ठीक हो जाओ । इस तरह अपनी पोतियों को अपने लिए परेशान देख सरला के पति और उसकी सास का दिल पिघल गया और उन्होंने सरला को ओर अपनी तीनो पोतियों को गले से लगाके माफ़ी मांगी।
कुछ दिन बाद सरला को प्रसव पीड़ा उठी और उसने एक नन्ही सी,प्यारी सी बेटी को जन्म दिया।।पर इस बार सरला के परिवार ने बेटी का पूरे दिल से लक्ष्मी समझकर स्वगात किया।

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