Nanha Guru

मम्मा सब ठीक हो जाएगा, आप सब कुछ कर सकती हो मम्मा। ये शब्द जिंदगी भर मेरे कानों में गुंजते रहेंगे। जब -जब मुझे मायूसी घेरेगी, जब भी मेरे हिम्मत जवाब देगी या फिर जब भी मेरा आत्मविश्वास डगमगाऐगा, तब यही शब्द मुझे वो हिम्मत देंगे जो दुनिया की कोई चीज नहीं दे सकती। एक बच्चा जब मां की कोख से नौ महीने बाद इस दुनिया में कदम रखता है तब से उसके साथ एक गुरू के रूप में उसकी मां हर कदम पर खड़ी होती है। मां एक गुरू ही नहीं एक ऐसी दोस्त भी होती है जो बिन कहे अपने बच्चे की हर बात समझ जाती है। हर वक्त अपसे बच्चे को आत्मविश्वास से भरने वाली मां भी कभी-कभी कमजोर पड़ जाती है। निशा ही वो मां थी जो धीरे -धीरे कमजोर पड़ती जा रही थी। 5 साल केे सोहम की मां निशा ने बेटे के जन्म के बाद अपने करियर को बैकसीट पर रख दिया था। बढ़ता वजन और गिरती सेहत ने निशा को मानसिक रूप से काफी कमजोर बना दिया था। काफी चिढ़चिढ़ी भी होती जा रहीं थी। देखते ही देखते सोहम तो पांच साल का हो गया लेकिन निशा दिन ब दिन बिखर रही थी।घर का कोई काम निशा सही से नहीं कर पाती थी। हर वक्त घर बिखरा रहता था। कई बार तो उसके पति कह देते थे कि क्या निशा तुमसे एक बच्चा और घर भी नहीं संभाला जाता ? हम इंसानों की फितरत होती है कि हम अपना गुस्सा हमेशा कमजोर पर ही निकालते हैं। निशा ने भी यही किया। वो बात-बात पर सोहम को डांटने लगी, उससे बात भी करती तो बेरूखी से। लेकिन वो मासूम उसके अकेलेपन का साथी था।मम्मा आप रोओ मत, सब ठीक हो जाएगा। अचानक से सोहम ने बड़ी मासूमियत से बोला। उसकी नन्ही बाहें निशा के गले में झूल रही थी। सोहम की आंखों में चमक और होठों पर मुस्कान थी। कितनी आसानी से उसने ये सब बोल दिया था। निशा को अचानक लगा जैसे वो किसी मजबूत बाहों में है। सोहम की नजरों में निशा को वो विश्वास दिखा जो वो खुद पर से खो चुकी थी। सोहम ने प्यार से उसके आंसू पोंछे और बोला कि मम्मा आप ही तो कहती हो कि हर प्राब्लम का सोल्यूशन होता है। पता नहीं लेकिन सोहम की बातों में जादू था। निशा को लगा कि ये तो वो नन्हा गुरू है जो उसे कितनी आसानी से समझा रहा है। उसकी बातों में भरोसा था जो उसे नई उम्मीद के साथ मुश्किलों से, खुद से लड़ने का हौसला दे रहा था। एक मासूम बच्चा जिसने अभी ममता के आंचल से बाहर की दुनिया में कदम भी नहीं रखा वो इतनी उम्मीदों से कैसे भरा हो सकता है?मां भी कभी कमजोर हो सकती है। उसे भी मायूसी घेर सकती है। लेकिन एक मां होने से पहले वो इंसान है। जिससे सबको यही उम्मीद होती है कि वो कमजोर नहीं पड़ेगी। उसे भी तो राह दिखाने वाला कोई गुरू होना चाहिए। जिस मासूम की पहली दोस्त, पहली गुरू मां होती है, कभी -कभी वही बच्चा मां का गुरू बना जाता है।

Comments

  1. Anshu

    मां बेटे के रिश्ते को बहुत ही प्यारे रूप में प्रस्तुत किया है। कहानी बहुत अच्छी लिखी हैं।

  2. Bajrang Gupta

    Impactful way of story telling.
    Practically in current world, many can related to this story.
    Keep Writing. All the best for time ahead.

  3. Vikas Sharma

    Nanha Guru is amazing. Lots of blessings to Nidhi Anand. Leep writing and also keep us posted.

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