Yaadein

फिर चली आई हैं वही बारिशें,
जिनमें मैंने तेरे लिखे वो ख़त बहाए थे,
हर लफ्ज़ तेरी चिट्ठियों के कुछ ऐसे घुले हैं इन पानीयों में,
के अब बरसात की हर बूंद
तेरे ही ख़त की महक में लिपटी के आती है..

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