zindagi ke sukhe patte

पेड़ों को भी क्या अपने पत्ते झड़ जाने का कभी कोई अफ़सोस होता होगा??

या उसकी टहनियों में नए उभर रहे जीवन की उम्मीद में वो पुराने लू के थपेड़ों से मुरझाए उन ज़िंदगियों को मुक्त कर सुकून से अपने अंदर एक लम्बी सांस भर, कद में थोड़ा और ऊँचा महसूस करता होगा!!

ज़िन्दगी भी शायद इन्ही पेड़ों की तरह महसूस करती होगी, जब भी बेजान मुरझाए सूखे पत्तों सा नाज़ूक खाल वाला कोई पत्ता उसकी शाखों से झड़ कर उसे अलविदा कह देता होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.